शिवपुरी। अगर शहर की सुबह की पहचान की जाए, तो वह सिर्फ सूरज की पहली किरणों से नहीं, बल्कि कढ़ाई में छनती बेडई की खुशबू से होती है। यहां घरों से निकलते ही नाश्ते की पहली पसंद जो नाम जुबां पर आता है, वह है—गरमा-गरम बेडई। वैसे तो शहर में एक दर्जन से अधिक ठिकानों पर बेडई मिलती है, लेकिन जब “रियल टेस्ट” की बात आती है, तो बाजार में मन्या हलवाई की बेडई का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। यह सिर्फ एक नाश्ता नहीं, बल्कि स्वाद की वह परंपरा है, जिसे लोग “शिवपुरी की तीसरी पीढ़ी की बेडई” के नाम से पहचानते हैं।बनावट में ही छुपा है स्वाद का राज
बेडई की खासियत उसकी बनावट में ही झलकती है। जहां कचौड़ी मैदे से बनती है आमतौर पर मोटी और गोल होती है, वहीं बेडई को आटे की लोई को पूड़ी की तरह पतला बेला जाता है। इसके अंदर उड़द दाल और मसालों का खास मिश्रण भरा जाता है, जो हर कौर में तीखापन और चटपटापन घोल देता है। कढ़ाई से निकलते ही इसका कुरकुरापन लोगों को अपनी ओर खींच लेता है।
आलू की सब्जी संग बनती है परफेक्ट जोड़ी
शिवपुरी और ग्वालियर-चंबल अंचल में बेडई की असली पहचान उसकी “जुगलबंदी” से होती है। इसे तीखी, मसालेदार आलू-टमाटर की रसेदार सब्जी के साथ परोसा जाता है। यह सब्जी इतनी चटपटी होती है कि बेडई के हर निवाले में स्वाद का नया तड़का लगाती है।
परंपरा से स्वाद तक का सफर
मन्या हलवाई की बेडई सिर्फ नाश्ते में पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक स्वाद यात्रा है। सुबह-सुबह दुकान पर लगने वाली भीड़ इस बात का प्रमाण है कि बदलते वक्त में भी शिवपुरी के लोग अपने असली स्वाद को नहीं भूले हैं।
क्यों कहलाती है तीसरी पीढ़ी की बेडई
इस स्वाद की असली ताकत इसकी विरासत में छिपी है। वर्तमान में करीब 35 वर्षीय युवा मोंटी अपने हाथों से गरमा-गरम बेडई बनाकर लोगों को परोस रहे हैं। इससे पहले उनके पिता, जिन्हें शहर में बबले भैया के नाम से जाना जाता है, वर्षों तक इस स्वाद को कायम रखते रहे। और इस परंपरा की नींव रखी थी मन्या हलवाई ने, जिनकी कढ़ाई से शुरू हुआ यह सफर आज तीसरी पीढ़ी तक पहुंच चुका है। पुराने ग्राहकों का कहना है कि इस बेडई का स्वाद वर्षों से बरकरार है-बल्कि हर साल और निखरता जा रहा है।
मोंटी सैन का कहना है हमारे दादा जी ने जो बेडई की रेसिपी शुरू की थी उसमें बदलाव नहीं किया है आमतौर पर कई स्थानों पर बेडई के नाम पर मिस्सी पूड़ी दी जाती है लेकिन बेडई में सिर्फ आटा होता है और उसके अंदर मूंग दाल और उसमे स्पेशल कई तरह की मसाले बनाया जाता है। बेडई की जान इसके अंदर भरने वाले मसाले में ही होती है। इस मसाले को स्पेशल तैयार किया जाता है इस कारण हमारी बेडई का स्वाद लाजवाब होता है
पूरे देश में नहीं मिला ऐसा स्वाद
पुणे में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम कर रहे प्रवेश गौतम बताते हैं-
जब भी सुबह बाहर नाश्ता करने का मन करता था, तो सबसे पहले शिवपुरी की स्पेशल मन्या भाऊ की बेडई याद आती थी। पूरा देश घूम लिया, लेकिन ऐसा स्वाद कहीं नहीं मिला। अब जब भी शिवपुरी आते हैं, इस बेडई का स्वाद लिए बिना वापस नहीं जाते।”
यानी साफ है,शिवपुरी की सुबह सिर्फ एक समय नहीं, बल्कि एक स्वाद है… और उस स्वाद का नाम है-मन्या हलवाई की बेडई।
मन्या हलवाई भैरो बाबा मंदिर के सामने धर्मशाला रोड शिवपुरी फोन 9340596701
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